भक्तिरसामृतसिन्धु ( Bhakti Rasamrit Sindhu (Hindi) )
Author: His Divine Grace A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada
Summary
भक्तिरसामृतसिन्धु
भक्तियोग का सम्पूर्ण विज्ञान जीवन का मूल सिद्धान्त यह है कि, हममें किसी ना किसी से प्रेम करने की सामान्य प्रवृत्ति होती है। कोई भी व्यक्ति किसी अन्य से प्रेम किए बिना जीवित नहीं रह सकता। यह प्रवृत्ति हर जीवात्मा में विद्यमान है। वर्तमान क्षण में, मानव समाज हमें यह सिखाता है कि, हम अपने देश से, परिवार से या अपने आप से प्रेम करें, परन्तु यह जानकारी कोई नहीं देता कि, वह कौनसी जगह है, जहाँ पर प्रेम रखने के बाद हर कोई सुखी बनता है। वह खोया हुआ बिन्दु कृष्ण है और भक्तिरसामृतसिन्धु हमें सिखाता है कि कृष्ण का वह आदि प्रेम कैसे उत्तेजित करें और उस स्थिती में कैसे आए, जहाँ पर हम आनन्दपूर्ण जीवन बिता सके।
Product Details
- No Of Pages: 406
- Author: His Divine Grace A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada
- Language: Hindi
- ISBN Code: 978-93-82716-23-5
- Product Size: 22.4 x 14.5 x 2 (cms)
- Weight: 0.509 (Kgs)
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